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Showing posts from April 26, 2018

ढूंढते है।

चलो, बेशुमार खुशियों की कोई  वजह ढूंढते है। जहाँ गम ना हो कोई एसी जगह  ढूंढते है। चलो, साहिल से निकल कर अब किनारा ढूंढते है। जो कभी ना छोड़े साथ ऐसा सहारा  ढूंढते है। चलो, बेवजह मुस्कुराने का बहाना  ढूंढते है। रूठी हुई किस्मत को मनाने  ढूंढते है। चलो, वोह आसमान में खोया हुआ गुब्बारा  ढूंढते है। दिल भर जाए अगर उडते उडते, तो जमीन पर टूटा हुआ सितारा  ढूंढते है। चलो, वोह खोई हुई यादों का पिटारा  ढूंढते है। वोह बीते हुए पलों का हसीन नजारा  ढूंढते है। चलो, वोह माँ की हसी जैसा सुकून  ढूंढते है। वोह पापा के इरादे जैसा जुनून  ढूंढते है। चलो, यह भटकती मुसाफिर सी ज़िन्दगी मे अब ठिकाना  ढूंढते है। बहुत रह लिया रातों के अंघेरो में, अब उजाला ढूंढते है।